



गीताश्री
आधी दुनिया के लिए यह खुश होने का वक्त है.भारत में महिला आरक्षण बिल पर मचे बवाल ने आधी आबादी की दुनिया में जहां मायूसी का आलम पैदा किया है, वहीं बाहर से आई एक ताजा खबर सूकून देने वाली है. अब सऊदी अरब में महिलाओं पर पाबंदी में कुछ रियायत मिलने वाली है. हल वक्त एक संरक्षक होने को अनिवार्य़ करने वाले नियमों को खत्म करने संबंधी कदम उठाने का संकल्प वहां की सरकार ने लिया है।
गीताश्री
अब तक आपने पढा सीरिया की खुशहाली की गाथा। इस बार वो व्यथा जिसकी याद सीरियाई लोगों को उदास कर देती है। सीरिया की राजधानी दमिश्क से दो घंटे की दूरी पर बसा गोलान एक पठार है, जो सीरिया को जॉडर्न, लेबनान और इजरायल से जोड़ता है।
सीरिया की गाथा के बीच प्रतिभा की यह कविता मेरे हाथ लगी। उन्होंने लिखा था-जरा देख कर बताइए..पढने के बाद मैं खुद को रोक नही पाई। ये कविता वो आईना है जिसमें दुनिया, समाज का प्रेम से डरा हुआ लेकिन खौफनाक चेहरा दिखाई पड़ता है।--गीताश्री
फिलहाल सीरियन लड़कियों के बारे में कई कई गाने याद आ रहे हैं. किनका किनका जिक्र करुं. गोरी चिट्टी छरहरी, सजी संवरी, फैशनपरस्त लड़कियां इत्र की खूशबू और मुस्कान बिखेरती जब पास से गुजरती हैं तो अंदाजा हो जाता है कि कहीं किसी की शामत आई है या 'या हबीबी' की तलाश जारी है.
इतनी उन्मुक्तता कि खुले कैफे में बैठी लड़कियों का झुंड ठाठ से हुक्का पी रहा होता है और मस्ती के तराने गा रहा होता है. किसी की फिक्र नहीं, कौन देख रहा है या सुन रहा है. नैतिक पुलिस जैसी कोई शय नहीं यहां. हुक्का उनकी संस्कृति का अंग है इसीलिए ऐसा नजारा आम है. हुई शाम उनका ख्याल आ गया..की तर्ज पर शाम होते ही कैफे में लड़को की तर्ज पर लड़कियों की भीड़ जुटने लगती है, चाय की प्याली से उठती गर्म भाप के साथ हुक्के का धुंआ बतकहियों के बीच खो जाता है. यहां परदानशीं लड़कियां भी बेखौफ-खुलेआम हुक्का पीती रहती हैं, अपने पार्टनर के हाथों में हाथ डाल कर देर रात तक घूमती रहती हैं. काले स्कार्फ में कसा माथा और गोरा चेहरा जब धुंआ उगलता है तो सोचिए क्या नजारा बनता होगा. चांद जैसे धुंए से घिरा हो. हंसी तो जैसे होठो पर बिजली की तरह खेलती रहती है.
एलेप्पो शहर में किले की सीढियां चढते उतरते मस्त लड़कियों का एक ग्रुप मिला. साथ में मेरी मित्र मंजरी थीं. उसने बिंदी लगा रखी थी. लड़कियां अचानक पलटी और अरबी-इंगलिश मिक्स भाषा में पूछने लगीं, ये क्या है? मैंने बताया--ये साइन है कि आप गॉड से ब्लेसड हैं. मैं जानबूझ कर बिंदी को सुहाग से नहीं जोड़ा. वैसे भी बिंदी अब फैशन स्टेटमेंट हो गई है. मंजरी ने साफ बता दिया, ये सुहाग की निशानी है और शादीशुदा औरतें लगाती हैं. पता नहीं उनकी समझ में अंग्रेजी कितनी आई, लड़कियों में बिंदी लगाने की होड़ मच गई. समूह में सिर्फ एक लड़की काली स्कार्फ (सीरियन लड़कियों को काले रंग से बहुत मोहब्बत है) पहने थी. उसने मना कर दिया. फिर कहा गया-लगा लो, उसने बहुत गंभीर होकर कहा-नो, थैंक्स, हमारे यहां अलाउड नहीं है.
ये लड़की उस वर्ग से आती है जो अभी भी अपनी पंरपरा को ढो रहा है. सीरिया का एक पारंपरिक वर्ग ऐसा है जहां परदा प्रथा अभी तक है. कुछ तबके की महिलाएं बुर्का भी पहनती हैं, कुछ सिर्फ स्कार्फ लगाती हैं. एक स्कार्फ वाली महिला ने हमें बताया कैसे उसके प्रेमी से दो साल बाद जब उसकी शादी हुई तब पहली बार प्रेमी-शौहर ने प्रेमिका-पत्नी की खुली जुल्फे देखीं. जब पहली बार देखा होगा काली जुल्फों को तब उसके शौहर को कैसा लगा होगा? वह बताती है, पहले तो वह इतने घने और रेशमी बालों को देख कर सन्न रह गया, फिर आहें भरीं...और करता भी क्या. कभी कहने का साहस ही जुटा पाया कि स्कार्फ उतारो. वह उसकी काली काली आंखों में ही तमाम सौंर्दय तलाशता रहा होगा. दो साल के प्रेम-संबंध में कभी वह अपना स्कार्फ उतारने की हिम्मत नहीं जुटा पाई. यह बताते हुए उसकी आंखें थोड़े अफसोस से भरी थीं. यह इनके समाज की तरफ से थोपी गई पाबंदी थी ना कि सरकार की तरफ से. यहां ईरान जैसा सलूक नहीं होता. आपकी मर्जी है, परदा मानो या ना मानो.
या हबीबीः ओ मेरे प्रेम
गीताश्री
सीरिया से कुवैत आते हुए फ्लाइट में सहयात्री अमेरिकी जेरी एल डौडरमैन ने एक सीरियाई यात्री से पूछा कि क्या तुम मेरे आईपॉड से गाना सुनना पसंद करोगे? संगीत प्रेमी सीरियाई ने मना कर दिया. बिजनेसमैन जेरी हंसा और बोला-क्यों, मैं एक अमेरिकी हूं इसलिए. भरोसा नहीं मुझ पर? सीरियाई झेंप गया. जेरी ने कहा, भई बुश का युग गया. अब ओबामा युग है. संबंध बदल रहे हैं. हम इतने बुरे नहीं. जेरी को इस सच्चाई का पता है कि सीरियाई अमेरिका से कितनी नफरत करते हैं और बिना उसकी सहायता के अपनी अर्थव्यवस्था को निरंतर मजबूत बनाए जा रहे हैं. वे उम्मीद करते हैं कि आने वाले दिनों में ये इंप्रेशन बदलेगा.
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