तंबाकू मुक्त पहला देश भूटान

Posted By Geetashree On 11:53 PM
गीताश्री

हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक बैठक में 172 देशो के प्रतिनिधि तंबाकू उत्पादो की बिक्री और इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए सहमत होगए हैं।
इससे जहां तंबाकू के खिलाफ अभियान चलाने वाली एजेंसियों को काफीराहत मिली है, वहींभारत में केंद्र सरकार के इस मसले पर ढीले ढाले रवैयेपर खासी नाराजगी भी है। ऐसे में यह खबर सूकूनदायक है कि भारत का पड़ोसी देश, दुनिया का पहला तंबाकूमुक्त राष्ट्र बन गया है।
अपने बगलगीर से मिले तंबाकू के धुंए से परेशान, सब्जी बाजारों, पार्कोंऔर स्टेशनों में तंबाकू-गुच्छे के पाउचों के सताए आप अगर वाकई किसी ऐसीजगह की तलाश में हैं जहां स्वच्छ हवा फेफड़ों तक पहुंचे, तो हिमालय कीगोद में बैठा ‘भूटान’ आपकी राह देख रहा है। दरअसल, यह देश अपनेमूल्यों के अनुरूप नीतियां बनाने का रिकॉर्ड बनाता जा रहा है। स्वच्छ पर्यावरण और नागरिक स्वास्थ्य के साथ ‘सकल राष्ट्रीय खुशी’ के प्रतिअपनी प्रतिबद्धता जताते हुए भूटान ने तंबाकू नियंत्रण कानून 2010 इसीवर्ष जून में ही पारित कर दिया। तारीफ इस कानून की तो होनी ही चाहिए पर उससे कहीं अधिक भूटान शासन के उस जज्बे की भी दाद दी जानी चाहिए जिसने एकबार तंबाकू निषेध की दिशा में असफल होने के बाद दोबारा प्रयास करने की ठानी।
सर्वेक्षण बताते हैं कि 1960-70 में करीब 50 प्रतिशत भूटानी शहरीजनता तंबाकू उत्पादों का सेवन करती थी। फिर बौद्ध धर्म के साथ जोडक़र एक उग्र आंदोलन तंबाकू सेवन के खिलाफ चलाया गया जिससे तंबाकू सेवन करनेवालों की संख्या में कुछ कमी देखी गई। फिर यकायक दिसंबर 2004 में दुनिया का ध्यान भूटान की ओर तब गया जब यहां के कानून ने तंबाकू उत्पादन के सेवन और बिक्री पर पूरी तरह रोक का कानून बना दिया और भूटान, तंबाकू पर पूर्णप्रतिबंध लगाने वाला पहला राष्ट्र घोषित हुआ। थिंपू में सिगरेट के पैकेट सावर्जनिक तौर पर जलाकर धूम्रपान का विरोध दर्ज किया गया। इन सबके बीच सरकार ने पाया कि अचानक बाजार में सिगरेट का दाम चौगुना हो गया और कालाबाजारी बढ़ती गई। परेशान होकर भूटान सरकार ने उस निषेध को वापिस लेलिया ताकि पूर्ण तैयारी के साथ एक बार फिर तंबाकू मुक्त भूटान की दिशामें नए प्रयास किए जा सकें। करीब ढाई साल की जमीनी चर्चाओं, सर्वेक्षणों और तीन बार भूटानी संसद में बहस के उपरांत जून 2010 में तंबाकू नियंत्रण कानून भूटानी संसद में बहुमतसे पारित हुआ। इस कानून की विशेषता इसका सीधा और स्पष्ट दृष्टिकोण है,साथ ही जिस तरह से इसमें सरकारी और गैर सरकारी एजेंसियों कीजिम्मेदारियां बताते वक्त स्पष्टता बरती गई है वो किसी भी कानून के सफल क्रियान्वयन के लिए बेहद आवश्यक है।
‘तंबाकू नियंत्रण कानून 2010’ भूटान के इस नए कानून के तहत, सभीव्यवसायिक केंद्रों, मनोरंजन केंद्रों, संस्थानों, कार्यालयों,मोनेस्टरीज, म्यूजियम, जोंग, स्कूल और कॉलेज, सार्वजनिक स्थानों,पारंपरिक उत्सवों, सब्जी बाजार, गाडिय़ों, टैक्सी स्टैंड पर धूम्रपान या उत्पादों के सेवन को जुर्म करार दिया गया है। इतना ही नहीं, इनजगहों पर देखरेख करने वाले अफसरों पर उन स्थानों को तंबाकू उत्पादों सेमुक्त रखने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।पर्यटकों और धूम्रपान के आदि लोगों को ध्यान में रखते हुए इस कानून नेसार्वजनिक व्यवसायिक क्षेत्रों के मालिकों को उनके लिए एक धूम्रपान विशेष स्थल का इंतजाम करने के निर्देश भी दिए है ताकि आम जनता को उस धुंए से बचाया जा सके। यह कानून तंबाकू सेवन करने वालों से कहीं ज्यादा तंबाकू मुहैया कराने वालों पर सख्त नजर आता है। हालांकि इसके तहत धूम्रपान केआदी व्यक्ति को सभी प्रकार के कर चुकाने के बाद अपने निजी इस्तेमाल के लिए तंबाकू आयात की स्वतंत्रता प्रदान की गई है पर साथ ही वित्त मंत्रालय को भी अयाजित तंबाकू की मात्रा पर नजर रखने को कहा गया है। भूटान का यह नया कानून तंबाकू की खेती और बिक्री को तस्करी के बराबर का जुर्म मानताहै और दोनों ही जुर्मो की वही सजा नीयत की गई है जैसी सजा तस्करी के लिएहै। भूटान के इस कानून में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि तंबाकू उत्पादनसे जुड़ी कोई भी कंपनी अपने लोगो के साथ न तो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्षविज्ञापन कर सकती है और न ही किसी आयोजन का प्रायोजक बन सकती है।तंबाकू मुक्त जीवन शैली के प्रचार की जिम्मेदारी जहां शिक्षा मंत्रालय को सौंपी गई है, वहीं तंबाकू से स्वास्थ्य को होने वाले नुकसानों के प्रतिजागरुकता फैलाने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य मंत्रालय को दी गई है। इन सबसेअलग पुलिस के साथ-साथ गृह मंत्रालय को कानून के सफल कार्यान्वयन कीजिम्मेदारी सौंपते हुए विभिन्न नियमों, सर्वेक्षणों, कार्यक्रमों औरअभियानों के लिए तंबाकू नियंत्रण बोर्ड स्थापना भी कर दी गई है।
भूटान में हालांकि अब तक इस कानून को लेकर कुछ संशय जाहिर किए जा रहे हैंऔर इसमें बरती गई सख्ती पर सवालों के बादल भी आते दिखाई पड़ते हैं, पर यह बात काबिले गौर है कि एकाएक आपको किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र पर स्मोकिंग करता हुआ नजर नहीं आएगा।भूटान में जगह-जगह पर स्पष्ट अक्षरों में तंबाकू सेवन के विरूद्घ संदेश दिखाई दे जाएंगी। सरकार का नजरिया बिलकुल स्पष्ट है कि मुक्त स्वास्थ्यसेवाओं को वो तंबाकू का सेवन करने वाले पर बल भी प्रयोग करने से बच रहीहै बल्कि वो चाहती है कि लोग स्वयं तंबाकू से किनारा करें, फिर कारण चाहे स्वास्थ्य की चिंता हो या फिर तंबाकू का सुलभ न होना हो। वैसे भी यहांअन्य देशो की तरह कोई मॉनिटरिंग एजेंसी नहीं है। इसीलिए चालान भी नहीं कटता।
थिंफू के एक कैफे की दीवार पर लगा पोस्टर बेहद दिलचस्प और मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालने वाला है। पोस्टर में दो लडक़े सिगरेट पी रहे हैं।
दो लड़कियां अलग खड़ी हैं।
लडक़े उनसे पूछते हैं, हे लड़कियों, क्या तुम हमारे साथ कॉफी पीना पसंद करोगी?
लड़कियां-सॉरी, हम उन लडक़ो को पसंद नहीं करते जो सिगरेट पीते हैं।
Satish Chandra Satyarthi
December 18, 2010 at 2:24 AM

अच्छा लगा..
भारत के सीखना चाहिए अपने इस छोटे से पड़ोसी मुल्क से.. हमारे यहाँ तो विश्वविद्यालय कैम्पसों के अंदर ही लोग खुलेआम धुएँ के छल्ले उड़ाते रहते हैं...
ब्लॉगिंग: ये रोग बड़ा है जालिम

कविता रावत
December 18, 2010 at 3:42 AM

Hamare desh ko bhi seekh lene kee sakht jarurat hai... tabaku se aaj desh mein cancer rogiyon kee sakhya nirantar badh rahi hai... kanoon sirf naambhar ka hai.... mahanagaron mein to sthiti aur bhi bahywah hai!

saarthak prasuti ke liye aabhar

Kajal Kumar
December 18, 2010 at 6:05 AM

बड़ी अच्छी बात है लेकिन बहुत से बे-दारू देश हैं ओर भारत में तो ऐसे राज्य भी हैं... (!)

देवेन्द्र पाण्डेय
December 18, 2010 at 7:22 AM

हमेशा की तरह नई जानकारी देती उम्दा पोस्ट के लिए बधाई।

खुशदीप सहगल
December 18, 2010 at 8:33 AM

वो लड़के सिगरेट पी रहे थे, लेकिन धुआं नहीं निकल रहा था...भला क्यों...
...

...

वो सिगरेट सीएनजी से जलती थीं...

जय हिंद...

शरद कोकास
December 24, 2010 at 2:31 AM

काश हमारे देश में भी ऐसा होता ।

Dr (Miss) Sharad Singh
December 31, 2010 at 6:28 AM

लेख बहुत अच्छा है। विचारणीय है।
नव वर्ष 2011 की अनेक शुभकामनाएं !

खुशदीप सहगल
December 31, 2010 at 7:43 PM

सुदूर खूबसूरत लालिमा ने आकाशगंगा को ढक लिया है,
यह हमारी आकाशगंगा है,
सारे सितारे हैरत से पूछ रहे हैं,
कहां से आ रही है आखिर यह खूबसूरत रोशनी,
आकाशगंगा में हर कोई पूछ रहा है,
किसने बिखरी ये रोशनी, कौन है वह,
मेरे मित्रो, मैं जानता हूं उसे,
आकाशगंगा के मेरे मित्रो, मैं सूर्य हूं,
मेरी परिधि में आठ ग्रह लगा रहे हैं चक्कर,
उनमें से एक है पृथ्वी,
जिसमें रहते हैं छह अरब मनुष्य सैकड़ों देशों में,
इन्हीं में एक है महान सभ्यता,
भारत 2020 की ओर बढ़ते हुए,
मना रहा है एक महान राष्ट्र के उदय का उत्सव,
भारत से आकाशगंगा तक पहुंच रहा है रोशनी का उत्सव,
एक ऐसा राष्ट्र, जिसमें नहीं होगा प्रदूषण,
नहीं होगी गरीबी, होगा समृद्धि का विस्तार,
शांति होगी, नहीं होगा युद्ध का कोई भय,
यही वह जगह है, जहां बरसेंगी खुशियां...
-डॉ एपीजे अब्दुल कलाम

नववर्ष आपको बहुत बहुत शुभ हो...

जय हिंद...

सतीश सक्सेना
February 8, 2011 at 6:20 AM

वाह वाह भूटान ...
पहली बार यह आवश्यक जानकारी मिली, ऐसे विवादित मगर जनहित कदम उठाने के लिए, शासकों में बड़े मानसिक साहस की आवश्यकता होती है ! भूटान से हमें सबक लेना चाहिए !
शुभकामनायें आपको !