लोकगीतो में स्त्रीमुक्ति का नाद

Posted By Geetashree On 7:55 PM 5 comments
यह खबर मुझे बहुत अच्छी लगी.यह चीज हरेक लोकभाषा में मिलेगी.


....महिला समाख्या द्वारा संकलित किए जा रहे हैं स्त्री मन की थाह लेने वाले गीत

....गीतो के जरिए महिलाओं के दुख-दर्द समझ कर इन्हें दूर किए जाने का होगा प्रयास
...अबतक नैनीताल से 20, टिहरी से 75, दून से 25, उत्तरकाशी और पौड़ी से दस दस लोकगीत एकत्रित
लोकगीत पहाड़ के आम जनजीवन की थाह पाने का सटीक जरिया है।इनमें वर्णित पहाड़, नदियां, मेले, खेतीबाड़ी, मौसम, शादी, बारात वहां की विशेषताओं को सामने लाते हैं। लोकगीतो ने पहाड़ की उन विद्रूपताओं और कष्टो को भी सुर दिए हैं जिनका शिकार वहां की अधिसंख्य महिलाएं हैं। महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले एसे ही लोकगीतो को संग्रहीत करने का बीड़ा उठाया है, महिला समाख्या ने। महिला समाख्या का कहना है कि इन गीतो के जरिए महिलाओं के मन की थाह पाकर उनके मुद्दों को आवाज देना इस कार्य का उद्देश्य है।

महिला समाख्या की राज्य परियोजना निदेशक गीता गैरोला बताती हैं कि राज्यके ग्रामीण अंचलो से सैंकड़ो एसे गीत संकलित कर लिए गए हैं जो अभी तक जंगलो और खेती खलिहानों में गूंजते रहे हैं। अब तक नैनीताल जिले से कई गीत जुटा लिए गए हैं। गैरोला कहती है कि महिलाओं की भूमिका घर, जंगल, खेती बाड़ी में पुरुषो से ज्यादा है। फिर भी समाज में उनको वह स्थान नहीं मिला, जिसकी वे हकदार हैं। समाज में महिलाओं की भूमिका और उसकी स्थिति से परदा उठाने के लिए लोकगीतो का सहारा लिया जा रहा है।

वह कहती हैं कि अबतक संकलित गीतो में महिलाओं की कई तरह की अभिव्यक्तियां पाई गई हैं। उनकी वेदना, यातना, मुक्ति की कामना,पुरुषो से कमतर आंके जाने की पीड़ा और उसके अंतरंग निजी क्षणों की गाथा इन गीतो में झलकती है।

इस अभियान से जुड़े सामाजिक कार्यकर्त्ताओं का कहना है कि साहित्य में तो स्त्री विर्मश खूब होता है लेकिन लोकगीतो के नजरिए से महिलाओं को अभी तक नहीं देखा गया है। महिलाओं को समझने के लिए लोकगीतो से बेहतर कोई और जरिया नहीं हो सकता।

(हिंदुस्तान अखबार से साभार)