होली की शुभकामनाएं

Posted By Geetashree On 1:38 AM
वही आदर्श मौसम
और मन में कुछ टूटता सा
अनुभव से जानता हूं कि यह वसंत है
- रघुवीर सहाय

वेलेंटाइन डे समझ में आने से बहुत पहले की बात है। होली पर प्रेम का इजहार होता था हमारे मोहल्ले में। कोई चौदह फरवरी का इंतजार नहीं करता था। सभी को होली का इंतजार रहता था कि कब होलिका दहन की रात आए और पूरी रात उसका दीदार हो पाए, जिसे देख पाना सपने की तरह होता है। पूरी रात लकड़ियां चुराना, क्योंकि उन दिनों खरीदने के पैसे नहीं हुआ करते थे, रंगीन ताव की झंडियां बना कर लई से सुतली पर चिपकाना और एक किनारा पकड़ कर दूसरा किनारा पकड़ने के बहाने हौले से उसका हाथ छू लेना और सुबह गुलाल लगाने के बहाने उसकी मांग लाल कर देने का शौक पूरा कर लेते थे। वही एक रात होती थी जब लड़कियों को घर से बाहर रहने की इजाजत होती थी। भाई बेशक साथ होते थे, लेकिन बहनों को छूट देने में उस दिन कोई कंजूसी नहीं। आखिर उन्हें भी तो किसी का इंतजार रहता था। सुबह चार बजे होलिका दहन की आंच में चमकते चेहरों को देख कर किसी भी मुड़े-तुड़े कागज पर लिखी गई शायरी शायद आज भी कहीं किसी डायरी में महफूज होगी। अब याद करती हूं तो लगता है, पता नहीं कौन सी वह दुनिया थी और कौन सी होली। बस याद है तो कुछ बातें. किसी की कोई हो...ली और कोई उन दिनों को याद कर बस रो...ली।
आकांक्षा पारे
अंशुमाली रस्तोगी
March 6, 2009 at 3:09 AM

आपको भी।

pankaj vyas
March 6, 2009 at 3:43 AM

aapki yaha post pasand aayi.

ise ratlam,jhabua(M.P.), Dahod(gujarat) se prakashit Dainik Prasaran me prakashit karane ja rahan hoo.

kripyaya, aap apana postal address send karen, taki prati post ki ja saken.

pan_vya@yahoo.co.in

उमाशंकर मिश्र
March 6, 2009 at 4:02 AM

smritiyon ke rangmahal ka jo taana baana aapne buna hai, behatrin hai.

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र
March 6, 2009 at 5:10 AM

वही आदर्श मौसम
और मन में कुछ टूटता सा
अनुभव से जानता हूं कि यह वसंत है

बहुत बढिया पोस्ट . आभार.

rajesh
March 6, 2009 at 6:29 AM

akanksha ko mai vyaktigat janata hu aur unki kalpnasheelata ka hamesha se kayal raha hu.... is bar bhi unhone achchi kalpana ki hai..holi ki shubhakamanao ke sath is prayas ke liye badhae...

संगीता पुरी
March 6, 2009 at 7:52 AM

आपको भी होली की शुभकामनाएं।

Kishore Choudhary
March 6, 2009 at 8:14 AM

सुन्दर लिखा है, आपको भी होली की शुभकामनायें

neeshoo
March 6, 2009 at 9:30 AM

आपको भी होली की बधाई....................

Khali Dimagh
March 6, 2009 at 9:55 AM

बहुत सुंदर...

akanksha
March 7, 2009 at 1:59 AM

पंकज जी आपको बहुत धन्यवाद की आपको मेरा पोस्ट पसंद आया। मेरा ई-मेल आई akpare@gmail.com है।

जितेन्द्र माथुर
June 14, 2011 at 2:48 AM

हृदय को कहीं हौले-से छू गया यह छोटा-सा संस्मरण । जब भी होली आती है, कई विरह-विदग्ध मन स्मृतियों के खंडहरों को आबाद करने लगते हैं । ठीक ही कहा है आपने - किसी की कोई हो...ली, और कोई उन दिनों को याद कर बस रो... ली ।

जितेन्द्र माथुर